धर्म

क्यों मनाई जाती है जनवरी के महीने में मकर संक्रांति,इसलिए पड़ा इस पर्व का नाम

क्यों मनाई जाती है जनवरी के महीने में मकर संक्रांति,इसलिए पड़ा इस पर्व का नाम

अरविंद शर्मा दताउली
भिण्ड:14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व आने वाला है, अभी से बाजारों में पतंग की दुकाने सज गई हैं, हलवाइयों की दुकानों में तिल की मिठाइयां बन रहीं है. लोग पूजा पाठ की तैयारी में जुटे हैं और 15 जनवरी का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह त्योहार हमेशा जनवरी में ही क्यों मनाया जाता है या इसका नाम मकर संक्रांति ही क्यों रखा गया,अगर नही जानते तो बने रहिए आज हम आपको खबर में बताने वाले है

देश में अपनी परंपराओं मान्यताओं और त्योहारों के लिए जाना जाता है. ऐसा कोई महीना नहीं होता जब हिंदू मान्यताओं के अनुसार कोई त्योहार या खास दिन ना हो, तिथि रीत के चलते हिंदू धर्म में हर दिन का एक ख़ास मतलब होता है,मकर संक्रांति के पर्व की तैयारी अक्सर लोग करने लगते है लेकिन कभी आपके ज़हन में भी यह बात तो जरूर आयी होगी कि इस त्योहार का ऐसा नाम क्यों पड़ा,ज्योतिषआचार्य राजेश शास्त्री बताते है शनिदेव और उनके पिता यानी सूर्य देव के बीच हमेशा विचारों के मतभेद बने रहते है, लेकिन बावजूद इसके जब पौष के माह में शनि मकर राशि में होते हैं और अपने पुत्र से प्रेम और स्नेह से मिलने सूर्य का भी प्रवेश मकर राशि में होता है उसी शुभ क्षणों को मकर संक्रांति कहा गया है.

सर्दी कम होने लगती है:,
लोगो की माने तो जनवरी महीने में पड़ने का एक ये भी कारण 15 जनवरी से सर्दी का अंतिम पड़ाव होता है. दिन सूर्य देवता का मकर राशि में प्रवेश करने के बाद से ही आगे दिनों में सर्दी हल्की हल्की कम होना शुरू हो जाती है,और यही से गर्मी शुरू हो जाती है जिससे मौसम का बदलाव भी मकर संक्रांति के दिन से ही शुरू हो जाते हैं यही वजह है अक्सर लोग सर्दी कम होने की चर्चा करते हैं, तो जवां पर एक ही बात निकलती है मकर संक्रांति के बाद सर्दी कम होने लगेगी।

मकर संक्रांति पूजा विधि:
आचार्य राजेश शास्त्री बताए है मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में मनाया जाने वाला है. इस दिन भक्त लोग पूजा करने से ये बातों को ध्यान में रखे सबसे पहले आपको सुबह उठकर सबसे पहले घर की साफ-सफाई करनी चाहिए. फिर आप पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें. अगर हो सके तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें. इसके बाद आप आचमन करके खुद को शुद्ध करें. फिर आप पीले कपड़े पहनकर सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें. इसके साथ ही आप अपनी अंजली में तिल लेकर बहती धारा में प्रवाहित करें. फिर आप पूरे विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा-अर्चना करें. पूजा के दौरान आप सूर्य चालीसा का पाठ करें. फिर आखिर में आरती करें और भोग लगा।

सावधान हिन्दुस्तान

Related Articles

Back to top button