शिव जी पर जल क्यों चड़ाया जाता है,नही पता तो जान ले इस में
शिव जी पर जल क्यों चड़ाया जाता है नही पता तो जान ले इस खबर में,
अगर नही पता पहली काँवर कब चढ़ाई गई थी,तो जान ले इस खबर में,
भगवान शिव जी के भक्त कृपा पाने के लिए दूर दूर से गंगाजल फरने जाते है,महादेव ओर जल चढ़ाते है लेकिन क्या आपको पता है आखिर भगवान भोलेनाथ पर गंगाजल क्यों चड़ाया जाता है,नही पता तो बने रहिए खबर में हम बताने वाले है,

,मान्यताओं के अनुसार जब हम जलभरक लाते है तब भगवान भोले नाथ को गौमुखी शीशी के पात्र में अगर जल चढ़ाते है तो भगवान शिव जी हम पर कृपा करते है,ऐसा कहा जाता है,चलिए अब बात कर लेते काँवर यात्रा कब से शुरू हुई पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को पीने के कारण भगवान शिव का कंठ नीला हो गया था विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए रावण ने कांवड़ में जल भरकर बागपत स्थित पुरा महादेव में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था तभी से कांवड़ यात्रा की परंपरा शुरू हुई।
कितने प्रकार को होती है काँवर:
शिवरात्री हो या सावन का महीने भगवान शिव जी के भक्त कई तरीके से काँवर भरने जाते है,अब अगर बात करे काँवर तो कई प्रकार से लाई जा सकती है,लेकिन मुख्यत 6 प्रकार की काँवर लाते है भक्त लोग
दांडी कांवड़
दांडी कांवड़ लेने जाने वाले शिवभक्त अपने कंधों पर वजन लेकर यात्रा करते हैं. इसमें एक लंबा बंदूक के समान डंडा होता है जिसे भक्त कंधे पर बांध कर ले जाता है. इससे भक्त का मानसिक, शारीरिक और सहन शक्ति का परीक्षण होता है.
खड़ी कांवड़
अब अगर और काँवर की बात करे तो एक खड़ी कांवड़ होती है,यह कांवड़ संकेत करती हैं कि वो अपने पैरों पर खड़े होकर भगवान शिव जी की पूजा करने के लिए तैयार हैं
डाक कांवड़:
डाक कांवड़ लेने वाले भक्त एक यात्रा के दौरान जल नहीं छूते हैं. इसके लिए वो अपने दोनों हाथों में कांवड़ बांध कर यात्रा करते हैं. इसके अलावा सफेद काँवर, पालकी काँवर,मंदिर काँवर सहित कई प्रकार की होती है।



